August 26, 2026

राष्ट्रीय युवा दिवस: देहरादून का ‘द साइलेंट बिस्ट्रो’ बना आत्मनिर्भरता और संकल्प की मिसाल

राष्ट्रीय युवा दिवस पर देहरादून के सहस्रधारा क्षेत्र में संचालित ‘द साइलेंट बिस्ट्रो’ युवाओं के आत्मविश्वास और जज़्बे की प्रेरक कहानी सामने लाता है। यह कैफे मुख्य रूप से श्रवण और वाणी बाधित युवाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है, जहां संवाद इशारों और सांकेतिक भाषा के माध्यम से होता है।

सितंबर 2025 में शुरू हुए इस कैफे में वर्तमान में 10 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से सात कर्मचारी श्रवण और वाणी बाधित हैं। अनुवादक तनिष्का के अनुसार, यहां उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और नेपाल के युवा भी कार्य कर रहे हैं। यहां परोसा जाने वाला भोजन साधारण हो सकता है, लेकिन इसके पीछे कर्मचारियों की मेहनत और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प जुड़ा है।

कैफे में कार्यरत युवाओं का मानना है कि यदि सांकेतिक भाषा को समाज में अधिक स्वीकार्यता मिले, तो दिव्यांगों का दैनिक जीवन आसान हो सकता है। कर्मचारी समरीन बताती हैं कि विदेशी पर्यटक अक्सर सांकेतिक भाषा समझ लेते हैं, जिससे संवाद सहज हो जाता है। भारत में जागरूकता की कमी के कारण कई बार अलगाव महसूस होता है।

23 वर्षीय समरीन देहरादून की निवासी हैं। उन्होंने बजाज संस्थान से पढ़ाई की और मुंबई के ताज होटल में इंटर्नशिप की। बाद में देहरादून के निजी रेस्तरां में काम किया, लेकिन संवाद की कठिनाइयों के चलते नौकरी छोड़नी पड़ी। तीन माह पहले द साइलेंट बिस्ट्रो से जुड़ने के बाद उन्हें आत्मविश्वास और संतोष मिला है।

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कैफे के सहायक प्रबंधक गौरिशंकर, जो टिहरी गढ़वाल से हैं, कहते हैं कि यहां काम करना उन्हें रोज प्रेरित करता है। पाबौ गढ़वाल की बहनें आयुषी और तनिष्का भी इस पहल का अहम हिस्सा हैं। आयुषी श्रवण और वाणी बाधित हैं, जबकि तनिष्का संवाद की कड़ी बनकर काम कर रही हैं। दोनों का मानना है कि यह कैफे न सिर्फ रोजगार दे रहा है, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच भी विकसित कर रहा है।

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