April 26, 2026

दुकान टूटने के बाद 5 साल बेरोजगारी का दावा, देहरादून के व्यापारी ने मांगा 30 लाख मुआवजा

देहरादून में एक व्यापारी ने मानवाधिकार आयोग के समक्ष अजीबोगरीब मामला उठाते हुए दावा किया है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण वह पांच साल छह महीने तक बेरोजगार रहा। इस आधार पर उसने 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।

मामले में आयोग के सदस्य गिरधारी सिंह धर्मशक्तु ने संज्ञान लेते हुए प्रकरण को मुख्य सचिव को भेजा है और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता रजनीश मित्तल का कहना है कि उनकी फोटोकॉपी की दुकान 31 जनवरी 2011 को सड़क चौड़ीकरण अभियान के दौरान तोड़ दी गई थी।

बताया गया कि उस दौरान कुल 19 दुकानें हटाई गई थीं, जिनमें से 14 दुकानदारों को पुरानी तहसील भवन की दीवार के पास जगह देकर पुनर्वासित कर दिया गया, लेकिन मित्तल को इससे वंचित रखा गया। जबकि वह नगर निगम में पंजीकृत विक्रेता थे।

इसको लेकर मित्तल ने उच्च न्यायालय सहित राज्यपाल और मुख्य सचिव को भी प्रार्थना पत्र दिए। बाद में प्रशासन ने उन्हें दुकान का एक हिस्सा देने का प्रयास किया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। वर्ष 2016 में उन्हें राजीव गांधी बहुउद्देशीय परिसर में दुकान आवंटित की गई।

मित्तल का आरोप है कि लंबे समय तक उचित व्यवस्था न मिलने से उन्हें पांच साल से अधिक समय तक बेरोजगारी झेलनी पड़ी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। इसी आधार पर उन्होंने मुआवजे की मांग की है।

सुनवाई के दौरान आयोग ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन बार-बार निर्देशों के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इस पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए मामले में गंभीरता से जांच कर उचित निर्णय लेने के लिए मुख्य सचिव को निर्देशित किया है।

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