रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा : प्रो. प्रणीता नंद
नरेंद्रनगर। धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय की यूथ रेड क्रॉस यूनिट, एनएसएस इकाई एवं वीरा फाउंडेशन देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस दौरान 13 छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर मानव सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड एवं वीरा फाउंडेशन के सहयोग से, परिवर्तन चैरिटेबल ब्लड सेंटर, ऋषिकेश की मदद से किया गया। शिविर का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्य प्रो. प्रणीता नंद ने किया। उन्होंने आयोजकों एवं रक्तदाताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है, और युवाओं को ऐसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।”
शिविर संयोजक डॉ. संजय महर ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य परिसर में जागरूकता बढ़ाना तथा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सके।
इस अवसर पर परिवर्तन चैरिटेबल ब्लड सेंटर, ऋषिकेश के पीआरओ अमन सहित पूजा भारद्वाज, आकांक्षा, अभिषेक राजपूत एवं विजय किशोर ने विशेष सहयोग प्रदान किया। रक्तदाताओं को प्रमाण-पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया। पीआरओ अमन ने बताया कि रक्तदान से न केवल समाज को लाभ होता है, बल्कि इससे रक्तदाता को स्वास्थ्य जांच का अवसर भी मिलता है और भविष्य में ब्लड कार्ड के माध्यम से जरूरत पड़ने पर रक्त उपलब्ध हो सकता है।
कार्यक्रम में “रक्तदान–महादान” के नारों के साथ 40 से अधिक प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता की। यूथ रेड क्रॉस के नोडल अधिकारी डॉ. संजय महर ने वीरा फाउंडेशन एवं देवभूमि ब्लड सेंटर का आभार व्यक्त करते हुए रक्तदाताओं के योगदान की सराहना की।
इस दौरान नशा मुक्त भारत अभियान की छठवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एंटी ड्रग कमेटी द्वारा जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। डॉ. विजय प्रकाश भट्ट एवं डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल ने नशे के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला और सभी उपस्थितों को “नशे को कहें ना” की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम में एनएसएस के नोडल अधिकारी डॉ. मनोज फोन्दणी, डॉ. सुशील कगड़ियाल, विशाल त्यागी, रंजना जोशी सहित महाविद्यालय के कई प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।