गंगा दशहरा : हरिद्वार में आस्था का महासैलाब, हरकी पैड़ी से गंगोत्री तक गूंजा ‘हर-हर गंगे’ का जयघोष
पूनम चौहान।
हरिद्वार। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर सोमवार को धर्मनगरी हरिद्वार आस्था के महासागर में डूबी नजर आई। तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए हर की पैड़ी पहुंचने लगे। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति की कामना की। मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन मां गंगा में स्नान करने से मनुष्य के दस प्रकार के पापों का नाश होता है।
उधर, हिमालय की गोद में बसे गंगोत्री धाम में भी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर सुबह से वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और घंटियों की मधुर ध्वनि से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मां गंगा के दर्शन और पूजन के लिए उमड़ती रहीं। बर्फीली चोटियों के बीच स्थित गंगोत्री धाम में भक्तों की आस्था देखते ही बन रही थी।
क्यों खास है गंगा दशहरा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद हुआ था। कहा जाता है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पर्वतों से मैदान की ओर उतरीं और पहली बार हरिद्वार पहुंचीं। इसी दिव्य घटना की स्मृति में हर वर्ष गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है।
इस बार गंगा दशहरा का महत्व इसलिए भी अधिक माना जा रहा है क्योंकि विशेष ग्रह-नक्षत्र योग में स्नान का शुभ संयोग बना। सोमवार सुबह 9:06 बजे से कन्या राशि स्थित चंद्रमा और वृषभस्थ सूर्य के विशेष योग में स्नान का मुहूर्त उपलब्ध हुआ, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हरिद्वार में प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। घाटों पर पुलिस, जल पुलिस, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं, जबकि सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गंगा दशहरा पर हरिद्वार और गंगोत्री में उमड़ी आस्था की यह तस्वीर एक बार फिर साबित कर रही है कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार हैं।
