June 21, 2026

यहां हर साल दिल्ली राष्ट्रपति भवन की ओर से भेंट किया जाता है नमक

महासू देवता मंदिर (फाइल फोटो)

प्रदीप चौहान
देहरादून। महासू देवता मंदिर हिमाचल प्रदेश से लगे उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिलान्तर्गत सीमान्त क्षेत्र त्यूनी-मोरी रोड पर हनोल गांव में टोंस नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर राजधानी देहरादून से 190 किलोमीटर किलोमीटर दूर स्थित हैं। उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, बिशैहर और जुब्बल तक महासू देवता की पूजा होती है। इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मन्दिर को न्यायालय के रूप में माना जाता है। महासू देवता के जो भक्त मन्दिर में न्याय की गुहार करते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती है। ‘महासू देवता’ मंदिर की दिलचस्प बात है कि यहां हर साल दिल्ली राष्ट्रपति भवन की ओर से नमक भेंट किया जाता है।

उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, बिशैहर और जुब्बल तक के लोग महासू देवता को मानते हैं न्याय के देवता

इस मंदिर में महासू देवता की पूजा की जाती हैं, जो कि शिवशंकर भगवान के अवतार माने जाते हैं। ‘महासू देवता’ एक नहीं चार देवताओं का सामूहिक नाम है और स्थानीय भाषा में महासू शब्द ‘महाशिव’ का अपभ्रंश है। चारों महासू भाइयों के नाम बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू (बौठा महासू) और चालदा महासू है, जो कि भगवान शिव के ही रूप हैं। महासू देवता के मंदिर के गर्भ गृह में भक्तों का जाना मना है। केवल मंदिर का पुजारी ही मंदिर में प्रवेश कर सकता है। यह बात आज भी रहस्य है, कि मंदिर में हमेशा एक अखंड ज्योति जलती रहती है जो कई वर्षों से जल रही है। मंदिर के गर्भ गृह में पानी की एक धारा भी निकलती है, लेकिन वह कहां जाती है, कहां से निकलती है यह अज्ञात है।

महासू देवता मन्दिर श्रद्धालुओं के लिए वर्ष भर खुला रहता है। राजधानी देहरादून से मन्दिर तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं पहला है देहरादून, विकासनगर, चकराता, त्यूणी होते हुये हनोल जो कि लगभग १८८ किमी है, दूसरा रास्ता देहरादून, मसूरी, नैनबाग, पुरोला, मोरी होते हुये हनोल जो कि लगभग १७५ किमी है। तीसरा रास्ता देहरादून से विकासनगर, छिबरौ डैम, क्वाणू, मिनस, हटाल, त्यूणी होते हुये लगभग १७८ किमी हनोल पहुंचा सकता है। हनोल में यात्रियों के रुकने हेतु एक जी.एम.वी.एन. का रेस्ट हाउस है जिसके लिये यात्री जी.एम.वी.एन. देहरादून प्रभाग से बुकिंग करा सकते हैं। हनोल भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का संगम स्थल होने के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आया है।

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